छत्तीसगढ़

भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन पर तीन दिवसीय कार्यशाला

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बिलासपुर, 4 जुलाई 2025/भू-जल संवर्धन एवं संरक्षण के लिए जिले में व्यापक अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला पंचायत के सभागार में आयोजित किया गया। आज कार्यशाला के समापन अवसर में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल शामिल हुए। कार्यशाला में सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल समेत संभाग के सभी जिलों के सीईओ जिला पंचायत ने भी भाग लिया। कार्यशाला में जल का बचाव कर भविष्य के लिए जल संरक्षण के उपायों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में भू-जल संरक्षण के विषय में रिजनल डायरेक्टर सी जी. डब्ल्यू, वी एनसीसीआर रायपुर से आये डॉ. प्रवीर के. नायक द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यशाला में भू-जल संवर्धन के लिए जनभागीदारी पर बल दिया गया। कैसे जन जागरूकता और प्रति व्यक्ति जिम्मेदारी के साथ इस समस्या का समाधान किया जाएगा, इस पर गहन चर्चा की गई।

कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने कहा कि पानी केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि जीवन का आधार है। जिस तेजी से भू-जल स्तर गिर रहा है। वह न केवल पर्यावरण के लिए बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक खतरा बन चुका है। हमने आने वाले पीढ़ियों का पानी भी उपयोग कर लिया है। उन्होंने कहा कि जल संकट से बचने के लिए यदि अभी से ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। जिस तेजी से हम भूमिगत जल का दोहन कर रहे है। उसी हिसाब से नीचे पानी नहीं भेज रहे है। पुराने समय में शहर भी नदियों के किनारे बसते थे। हमारे यहां बहुत अच्छी बारिश होती है लेकिन हम इसका संरक्षण नहीं कर पाते है। कलेक्टर ने कहा कि हमें जनभागीदारी से भू-जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयास करना होगा। राज्य में राजनांदगांव, धमतरी जिले में इस दिशा में सराहनीय कार्य किया गया है।

कलेक्टर ने कहा कि बिलासपुर जिले में भी हम जल संरक्षण एवं संवर्धन के लिए लगातार काम कर रहे है। गांव का पानी गांव में रोकने का प्रयास हमें जनभागीदारी से करना होगा। हमने मोर गांव मोर पानी अभियान के तहत कच्चा नाला बंधान, सोख्ता गड्ढा, रिचार्ज पिट, इंजेक्शन वेल, डिफक्ट बोर वेल जैसे नवाचार अपनाया है। एक ही दिन में 40 हजार सोकपिट बनाए गए। गांव-गांव में अभियान को लेकर जन जागरूकता के लिए रैली और संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। अभी तक जन जागरूकता के लिए गांव में 486 रैली निकाली गई है। उन्होंने कहा कि जल ऐसी चीज है जिससे जीवन यापन के लिए हर चीज बनाई जाती है पर जल नहीं बनाया जा सकता। यह प्राकृतिक है और सीमित है।

कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों ने वर्षा जल के संचय, संरक्षण और भू-जल को रिचार्ज करने के उपायों पर तीन दिन तक प्रशिक्षण दिया। विषय विशेषज्ञों ने कार्यशाला में कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्याप्त बारिश होती है इसके संरक्षण एवं संवर्धन से पानी की दिक्कतों को दूर किया जा सकता है। कार्यशाला में जन प्रतिनिधिगण, उद्योगपति, विभागों के कार्यपालन अभियंता और प्रबुद्धजन शामिल हुए।

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News Desk

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