अध्यात्म

गुमला में यहां 2,000 फीट की ऊंचाई पर बसते हैं बाबा वैद्यनाथेश्वर, रामायण काल से जुड़ी है मान्यता

गुमलाः झारखंड के गुमला जिले को ‘शिवनगरी’ कहा जाता है, क्योंकि यहां के कण-कण में भगवान शिव का वास माना जाता है. इसी जिले के पालकोट प्रखंड में स्थित पम्पापुर की ऊंची पहाड़ियों (श्रीमुख पर्वत) पर बाबा वैद्यनाथेश्वर मनोकामना लिंग मंदिर स्थित है. धरातल से लगभग 2,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पौराणिक महत्व के लिए भी प्रसिद्ध है.

मनोकामना शिवलिंग की महिमा
मंदिर के पुजारी रामू बाबा के अनुसार, इस शिवलिंग को ‘मनोकामना शिवलिंग’ के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे मन से अपनी मुराद लेकर आता है, महादेव उसकी झोली खाली नहीं रहने देते. चाहे नौकरी हो, व्यापार, संतान सुख या गंभीर शारीरिक व्याधियां बाबा वैद्यनाथेश्वर सभी कष्टों को दूर करते हैं. ऊंचाई और दुर्गम रास्ता होने के बावजूद ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के विभिन्न जिलों से हजारों भक्त यहाँ मत्था टेकने पहुंचते हैं.
रामायण काल से जुड़ाव
यह स्थान केवल शिव भक्तों के लिए ही नहीं, बल्कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के अनुयायियों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है. पौराणिक साक्ष्यों के अनुसार, इस पर्वत और इसके आसपास सुग्रीव गुफा स्थित है, जहां वानर राज सुग्रीव ने शरण ली थी. माता शबरी का आश्रम और मतंग ऋषि की कुटिया के अवशेष आज भी यहां की प्राचीनता को दर्शाते हैं. वहीं, पर्वत की इसी श्रृंखला में मां पम्पा भवानी का प्राचीन मंदिर भी है.

प्रकृति और अध्यात्म का संगम
पालकोट प्रखंड मुख्यालय से लगभग 25 किमी दूर स्थित यह स्थान सुकून और शांति का प्रतीक है. पहाड़ की चोटी पर पहुंचने के बाद भक्तों को एक अलग ही दिव्य शांति का अनुभव होता है. यहां का शांत वातावरण और मनोरम दृश्य पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. पुजारी जी का कहना है कि ऊंचाई देखकर घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि यहां पहुंचने के बाद मिलने वाला आत्मिक संतोष सारी थकान मिटा देता है.

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News Desk

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